गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

Bikhre sher

भला कब तक करेंगे गुफ्तगू,इन बुतकदों* में हम,
यहाँ दम घुट रहा है, उठ के कमरे तक चले आओ।

* मंदिरों

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

Bikhre sher

कटी है जिस तरह, उससे कोई शिकवा नहीं लेकिन,
कसक गुमनाम रहने की, जो थी सो अब भी कायम है।

Bikhre sher

दुआ के साथ पैसे थोड़े, अबके छोड़ आया हूँ,
सुना बेदाम चीज़ें, तुझ तलक अब जा नहीं पातीं।

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

Bikhre sher

दुआएं भेज दूँ लेकिन, कहाँ तुम तक वो पहुचेंगी,
खुदाओं में हमारे और तुम्हारे,अब भी झगड़ा है।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

Bikhre sher

हैं दो ही सूरतें जिनमें कोई दीवाना होता है,
यकायक प्यार में हो, या मुसलसल प्यार से खारिज।
* मुसलसल- लगातार