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शनिवार, 14 दिसंबर 2013

Bikhre sher

बालों में यूँ तो आ गयी, चाँदी- लटें भी कुछ,
ये दिल मगर, समझा है कब उम्रों की सरहदें।

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

Bikhre sher

आज फिर से हैं चुप ये दरवाजे, घर से आहट कोई नहीं आती,
आज फिर सो गया है वो थककर,आज फिर देर हो गयी शायद।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

Bikhre sher

अदीबों* को नहीं कल से , कोई हिचकी सताएगी,
किताबें अपनी मैंने , आज सब तुलवाके बेचीं हैं।

अदीब - writer,thinker

सोमवार, 25 नवंबर 2013

Bikhre sher

कमर पर बोझ है, झुक जाता हूँ हर बुत के आगे मैं,
अना मगरूर है लेकिन , झुकाए से नहीं झुकती।

अना- ego मगरूर- घमंडी, proud

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

Bikhre sher

मुश्किल है यूँ लफ्जों को, नुमाइश पर लगा पाना,
कीमत कम तभी है फलसफों की, चप्पलों से भी।
 (Talking to a "True" Gandhian)

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

Bikhre sher

कभी तो जिंदगी, मेरी भी देखे वाकया कोई,
फ़कत इक ख़्वाब पे ऐसे, भला कबतक लिखूँ नज्में।

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

Bikhre sher

निकलकर नॉविलों से, तंज़ करते हैं बहुत मुझपर,
मेरा रूटीन जीना देख, सब किरदार हैरां हैं।

@the beginning of a regular, univentfull day.
तंज़ - satire
किरदार- Role, actor

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

Bikhre sher

उनींदी आँख से मिलकर गले, फिर रूठ बैठा है,
गवारा ही नहीं उसको, मेरा यूँ देर से आना।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

Bikhre sher

भले सौ कोशिशें कर लूँ, सिफ़र ही हाथ आता है,
मैं खुद में ढूंढता हूँ, खुद को जब, खुद से ही घबराकर।

सिफ़र = zero

बुधवार, 18 सितंबर 2013

Bikhre sher

लग के मुझसे रोया था, कल शब न जाने कब तलक,
चाँद के रुखसार पे, अश्कों के अब भी दाग हैं।

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

Bikhre sher

जब कि मेरी जंग में, मैं ही मुखालिफ हूँ मेरे,
क्यूँ मैं लड़ने के तरीके, पूछता हूँ गैर से।

सोमवार, 16 सितंबर 2013

Bikhre sher

अपनी फरियाद लिए, और कभी आऊँगा,
आज महफ़िल में तेरे, शोर बहुत ज्यादा है।
in response to the crowded ganpati @ visarjan

Bikhre sher

हम आइना नहीं हैं, कि टूटेंगे इक दफे,
किस्तों में टूटने का मज़ा, हमसे पूछिए।

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

Bikhre sher

यकीं उनको नहीं होता, हमारी खुश्क आँखों का,
पड़ी है चाँद-चेहरे पे , कई सलवट सवालों की।

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

Bikhre sher

हँसी, मुस्कान, रिश्ते की बड़ी कमजोर कड़ियाँ हैं,
इसे मजबूत रखता है, बस इक साझा सा गम अपना।

सोमवार, 26 अगस्त 2013

Bikhre sher

भले सौ कोशिशें कर लूँ, कहाँ टिकते हैं मुट्ठी में,
ये दौलत, रेत, पानी और कुछ दिल से जुड़े रिश्ते।

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

Bikhre sher

जेहन का एक हिस्सा, जिसमें ख्वाबों की हैं कुछ कब्रें,
बहुत मासूम, बेहद खूबसूरत दिखता है मुझको।

सोमवार, 19 अगस्त 2013

Bikhre sher

मुझे अफ़सोस है, समझाया क्यूँ मँहगाई का मतलब,
कि बच्चे अब, खिलौनों के लिए भी जिद नहीं करते।

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

Bikhre sher

तुझे मिलने की कुछ वजहें, अभी भी हैं बची दिल में,
कि कुछ शिकवे-गिले , हमने अभी महफूज़ रक्खे हैं।

सोमवार, 12 अगस्त 2013

Bikhre sher

अधूरी ख्वाहिशों की पर्चियाँ, जेबों में जो रख लूँ,
तो फिर धुंधली नज़र से नज़्म का चेहरा नहीं दिखता।